5+ matlabi rishte dhoka shayari in hindi

 matlabi rishte dhoka shayari 

"सामने मुस्कान, पीछे चाकू"

वे दोस्तों की तरह हँसते हैं, लेकिन दुश्मनों की तरह योजना बनाते हैं,

उनके इरादे हवा के रुख में छिपे रहते हैं।

वे आपके साथ खड़े होने का दावा करते हैं, चाहे कुछ भी हो,

लेकिन आपको ऐसे छोड़ देते हैं जैसे दिन ढलते ही परछाई फीकी पड़ जाती है।

"विश्वासघात के मुखौटे"


उनकी दयालुता के पीछे, एक साजिश छिपी है,

हर पल परवाह धोखा साबित होती है।

उन पर भरोसा करना ही मेरा एकमात्र अपराध था,

उनके झूठ के खेल में, प्यार ही भेस था।

"किसी प्रियजन का खंजर"


कितना दर्दनाक होता है, रिश्तेदारों से धोखा खाना,

दिल टूट जाता है, भरोसा कमज़ोर हो जाता है।

जिनके लिए हम सबसे ज़्यादा गर्व करते हैं,

वे अक्सर अंदर से सबसे पहले छुरा घोंपते हैं।

"अंधा कर देने वाला सोना"


वे आपकी दौलत से प्यार करते हैं, आपकी आत्मा से नहीं,

उनके लिए, आप सिर्फ़ एक सीढ़ी हैं।

एक बार जब आपकी कीमत खत्म हो जाती है, तो वे चले जाते हैं,

आपके दिल में गहरे निशान छोड़ जाते हैं।

"नकली मुस्कान, खोखले वादे"


उनकी जुबान से झूठ की नदी बहती है,

शब्द तो बहुत मीठे हैं, पर उनका दिल सुन्न है।

मैंने यह सबक बहुत देर से सीखा,

कि हर मुस्कुराने वाला व्यक्ति वास्तव में स्वतंत्र नहीं होता।


ये शायरी स्वार्थी और धोखेबाज रिश्तों के दर्द और वास्तविकता को काव्यात्मक रूप में बयां करती है।

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